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त्रिकाल संध्या

विश्व सनातन धर्म सेवा ट्रस्ट

॥ जय श्री माधव ॥

Kalki Bhagawan

मानव सभ्यताक लेल, त्रिसंध्या संजीवनी (अमृत) समान अछि।

प्रतिदिन तीनों संध्या कालमे त्रिसंध्या करू, प्रतिदिन श्रीमद्भागवत महापुराणक एक अध्यायक पाठ करू, आ मनहि मन निरंतर 'माधव' नामक जप करू।

त्रिकाल संध्याक संग निम्नलिखित 5 शिक्षाकेँ धारण करू

1. आज्ञाकारी बनबाक लेल सीखू।

2. प्रतीक्षा करबाक लेल सीखू (धैर्य राखू)।

3. सभ जीवसँ प्रेम करबाक आ ओहि पर करुणा करबाक लेल सीखू।

4. इंद्रियसभ पर संयम राखू।

5. 'हम आ हमर, अहाँ आ अहाँक' (अहंकार) क भावनाक त्याग करू।

त्रिसंध्याक तीन समय

प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्तमे, सूर्योदयसँ पूर्व
मध्याह्न 11:3012:30 क बीच
सायंकाल सूर्यास्तसँ तीस मिनट पहिने आ तीस मिनट बाद क बीच कएल जा सकैत अछि

त्रिसंध्या विषय-सूची

  • 1. मंत्र
  • 2. श्री विष्णोः षोडशनामस्तोत्रम्
  • 3. श्री दशावतार स्तोत्रम्
  • 4. दुर्गा-माधव स्तुति
  • 5. 108 बेर "माधव" नाम (मनहि मन)
  • 6. कल्कि महामंत्र
  • 7. जयघोष

उच्चारणक संबंधमे एकटा विनम्र निवेदन

सही उच्चारणक लेल कृपया आधिकारिक त्रिसंध्या ऑडियो सुनू (एकरा 1.5x स्पीड पर सुनब बेसी उपयुक्त अछि)। लिप्यंतरणमे मामूली भिन्नता भऽ सकैत अछि, अतः उच्चारणमे सहज भेबा धरि एकरा सुनू।
नोट: माधव नाम जप मनहि मन करबाक अछि, जखन कि ऑडियोमे ओहि स्थान पर माधव गीत गाओल गेल अछि।


1. मंत्र

[
'ॐ' ] * 3 बेर
[
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात् ॥
] * 3 बेर

2. श्री विष्णोः षोडशनामस्तोत्रम्

(श्री विष्णुजीक सोरह नाम)

औषधे चिन्तयेत् विष्णुं । भोजने च जनार्दनम्
शयने पद्मनाभं च । विवाहे च प्रजापतिम्
युद्धे चक्रधरं देवं । प्रवासे च त्रिविक्रमम्
नारायणं तनुत्यागे । श्रीधरं प्रियसंगमे ।
दुःस्वप्ने स्मर गोविन्दं । संकटे मधुसूदनम्
कानने नारसिंहं च । पावके जलशायिनम्
जलमध्ये वराहं च । गमने वामनम् चैव ॥
पर्वते रघुनन्दनं
[ सर्व कार्येशु माधवम् ] ॥ * 3 बेर
षोडशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत् सर्वपाप विनिर्मुक्तो विष्णुलोके महीयते ॥

3. श्रीदशावतार स्तोत्रम्

(श्री जयदेव जी द्वारा रचित दश अवतार स्तोत्र)

प्रलय पयोधि-जले धृतवान् असि वेदम् ।
विहित वहित्र-चरित्रम् अखेदम् ।
केशव धृत-मीन शरीर जय जगदीश हरे ॥ 1 ॥

क्षितिरति विपुलतरे तव तिष्ठति पृष्ठे ।
धरणि धरण किण चक्र गरिष्ठे ॥
केशव धृत-कच्छप-रूप जय जगदीश हरे ॥ 2 ॥

वसति दशन-शिखरे धरणी तव लग्ना ।
शशिनि कलंक कलेव निमग्ना ॥
केशव धृत-शूकर रूप जय जगदीश हरे ॥ 3 ॥

तव कर कमल-वरे नखम् अद्भुत श्रृंगम् ।
दलित-हिरण्यकशिपु-तनु भृंगम् ॥
केशव धृत-नरहरि रूप जय जगदीश हरे ॥ 4 ॥

छलयसि विक्रमणे बलिम् अद्भुत वामन ।
पद-नख नीर जनित जन-पावन ॥
केशव धृत-वामन रूप जय जगदीश हरे ॥ 5 ॥

क्षत्रिय रुधिर मये जगद्-अपगत पापम् ।
स्नपयसि पयसि शमित भव तापम् ॥
केशव धृत-भृगुपति-रूप जय जगदीश हरे ॥ 6 ॥

वितरसि दिक्षु रणे दिक पति कमनीयम् ।
दश-मुख मौलि-बलिम् रमणीयम् ॥
केशव धृत-रघुपति रूप जय जगदीश हरे ॥ 7 ॥

वहसि वपुषि विशदे वसनम् जलदाभम् ।
हल-हति-भीति-मिलित-यमुनाभम् ॥
केशव धृत-हलधर-रूप जय जगदीश हरे ॥ 8 ॥

निन्दसि यज्ञ विधेर अहह श्रुति जातम् ।
सदय हृदय दर्शित पशु-घातम् ॥
केशव धृत-बुद्ध-शरीर जय जगदीश हरे ॥ 9 ॥

म्लेच्छ निवह निधने कलयसि करवालम् ।
धूमकेतुम्-इव किम् अपि करालम् ॥
केशव धृत-कल्कि शरीर जय जगदीश हरे ॥ 10 ॥

श्री-जयदेव-कवेर इदम उदितम् उदारम् ।
शृणु सुख-दम् शुभ दम् भव-सारम् ॥
केशव धृत-दश-विध रूप जय जगदीश हरे ॥ 11 ॥


4. दुर्गा - माधव स्तुति

(दुर्गा - माधव स्तुति पाठ)

जय हे ! दुर्गा माधव कृपामय कृपामयी।
दुर्गान्कु सेबी माधव होइले मो दीअं साईं ॥ 0 ॥

जय हे ...

बहू रुपे जय दुर्गे, ब्यापी अछु सर्व ठाबे ।
रमा उमा बाणी राधा तो छड़ा अन्य के नाहिं ॥ 1 ॥

जय हे ...

मदन-मोहन रुपे ब्यापी अछु सर्व ठाबे ।
मोहन चित्त मोहिलू श्री सर्व मंगला तुही ॥ 2 ॥

जय हे ...

धर्म संस्थापने जन्म यदी ह्वन्ति नारायण ।
दुर्गान्कु छाड़ी माधब खेलि बार शक्ति काहिं ॥ 3 ॥

जय हे ...

माधबन्क खेल पाइं देह धरू महामायी।
माधबन्कु पति पुत्र रुपे खेलाउछु तुही ॥ 4 ॥

जय हे ...

माधबन्कु दुर्गा कोले जेहूं देखे बेनी डोले ।
ताहार भाग्यर कथा ब्रह्मा शिबे न जोगाई ॥ 5 ॥

जय हे ...

जय दुर्गति नाशिनी अभिरामर जननी।
शुभागमन करंतू माधबन्ku कोले नेई ॥ 6 ॥

जय हे ...


5. 108 बेर "माधव" नाम (मनहि मन)

[ 'माधव' ] * 108 बेर

जगन्नाथ महाप्रभुक 'माधव' नामक 108 बेर जप करू।

एकरा जोरसँ नहि बाजू। अपन उंगलीसभ पर गिनू आ मनहि मन नामक जाप करू।


6. कल्कि महामंत्र

[
राम हरे कृष्ण हरे, राम हरे कृष्ण हरे ।
राम हरे कृष्ण हरे, अनंत माधव हरे ॥
] * 11 बेर

7. जयघोष

जयघोषक पाठ मनहि मन कएल जेबाक चाही, जोरसँ बाजि कऽ नहि।

(जँ अहाँ ठाढ़ अवस्थामे छी, तखनहि एकर पाठ जोरसँ कएल जा सकैत अछि।)

त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव
[ त्वमेव सर्वं मम देव देव ] ॥ * 3 बेर

ॐ नमो ब्रह्मण्य देवाय गो-ब्राह्मण हिताय च |
जगत् हिताय कृष्णाय गोविंदाय नमो नमः ॥

[ ॐ अनंत कोटि विश्व ब्रह्माण्ड नाथ परब्रह्म नारायण महाविष्णु भगवान कल्किराम श्री श्री श्री सत्य अनंत माधव महाप्रभु जी की जय! ] * 3 बेर

[ माता महालक्ष्मी जी की जय! ] * 3 बेर

[ माता वैष्णो देवी जी की जय! ] * 3 बेर

[ सर्व देवी-देवताओं की जय! ] * 3 बेर

[ सुधर्म महा-महा संघ की जय! ] * 3 बेर

[ सुधर्म महा-महा संघ की जय! ] * 3 बेर

हे प्रभु ! शीघ्रसँ शीघ्र सम्पूर्ण विश्वक भक्तसभक एकत्रीकरण हो —

[ बाजू आनंदे एक बेर, "हरि हरि", "हरि हरि", "हरि हरि" ]

हे प्रभु! यथाशीघ्र ई पृथ्वी, सभ विश्व पर सत्य, प्रेम, दया, क्षमा आ शांति क स्थापना हो —

[ बाजू आनंदे एक बेर, "हरि हरि", "हरि हरि", "हरि हरि" ]

जय श्री माधव


महत्वपूर्ण निर्देश

आइयो, जखन विज्ञान आ आध्यात्मिकता दुनू गोटे आबयवला पैघ परिवर्तनक आहट महसूस कऽ रहल छथि, मानवताक लग एहि संकटसँ उबरबाक कोनो निश्चित साधन नहि अछि। 'भविष्य मालिका' क अनुसार — पाप कर्मसभक त्याग करू, आ जीवनक रक्षाक लेल हर धर्मक लोक 'त्रिसंध्या' केँ अपनाऊ।

युग परिवर्तनक एहि समयमे, ई गुप्त सिद्धांतहि जीवनक रक्षाक लेल एकमात्र मृत संजीवनी अछि।
जे लोक सत्ययुगमे पहुँचबाक चाहैत छथि, हुनका एहि शिक्षासभकेँ अपन जीवनमे धारण करबाक चाही।

धर्म स्थापनाक समय भगवान कल्कि क निर्देशसभक अनुसार, हमरासभकेँ अपन जीवनमे एहि बातसभक पालन करबाक चाही:

1. सभ जीव पर करुणा देखाऊ। मांस खाएब छोड़ि दिअ आ सात्विक जीवन अपनाऊ। कोनो भी जीव वा इंसानकेँ कोनो भी तरहक नुकसान नहि पहुँचाऊ।

2. एहि युगमे माधव (भगवान) क नामक जप करू। अहाँ चाहब तँ जोरसँ जप कऽ सकैत छी वा मनहि मन हुनकर नाम याद कऽ सकैत छी।

3. प्रत्येक व्यक्ति केँ एहि पाँच गुणसभकेँ धारण करबाक चाही: सत्य, प्रेम, दया (करुणा), क्षमा आ शांति।

4. प्रत्येक व्यक्ति केँ नियमित रूपसँ सत्संगमे भाग लेबाक चाही। सत्संगक अर्थ अछि भगवानक गुणसभक गान करबाक, हुनकर महिमाक वर्णन करबाक आ आध्यात्मिक चर्चा करबाक लेल एक संग इकट्ठा होएब।

5. प्रतिदिन त्रिसंध्या करू — प्रातः, मध्याह्न आ सायंकाल भगवानक स्मरण आ स्तुति करू।

6. प्रतिदिन भगवान कल्कि द्वारा देल गेल कल्कि महामंत्रक जप करू।

7. प्रत्येक व्यक्ति केँ धर्मक मार्ग पर चलबाक चाही।

8. जाति आ धर्मक भेदभावसँ ऊपर उठि कऽ, सभक संग सत्संग करू।

9. 'हम' आ 'हमर' क भावनाक त्याग करू। एहन अहंकार आ लगाव व्यक्ति केँ ओकर वास्तविक आध्यात्मिक स्वभावसँ दूर लऽ जाइत अछि।

10. प्रतिदिन घर पर श्रीमद्भागवत महापुराणक पाठ करू। समय भेटला पर भजन, कीर्तन, पुराण, शास्त्र, भविष्य मालिका आ अन्य आध्यात्मिक ग्रंथसभक अध्ययन करू।

11. प्रत्येक महिला केँ 'माता'/'मा' आ प्रत्येक पुरुष केँ 'भाई' कहि कऽ संबोधित करू।

12. भोजन करबासँ पहिने, भगवानकेँ भोजन अर्पित करू।

13. जँ अहाँ भगवान कल्कि आ एहि महान कार्यक बारेमे बेसी जानबाक चाहैत छी, तँ एहि पुस्तिकाक अंतमे देल गेल मोबाइल नंबर पर संपर्क करू।


सभसँ बेसी पूछल जेनिहार प्रश्न

1. त्रिसंध्या अभ्यासक बारेमे सामान्य प्रश्न

त्रिसंध्या बिना स्नान कएने सेहो कएल जा सकैत अछि। अपन माथ पर हाथ राखू आ "श्री गंगे" तीन बेर बाजि कऽ माता गंगाक स्मरण करू। जँ संभव हो, तँ पहिने अपन पैर धो लिअ आ अपन ऊपर किछु जल छिड़कि लिअ।

त्रिसंध्या कतहुओ कएल जा सकैत अछि — रास्तामे, ट्रेनमे, गाड़ीमे, अपन कार्यस्थल पर, वा मनहि मन (हृदयमे) चुपचाप। कोनो न कोनो रूपमे, कोनो न कोनो स्थान पर, एकरा बिना चूकने कएल जेबाक चाही।

श्रीमद्भागवत महापुराणक पाठ केवल स्नान करबाक बाद, पवित्र भेला परहि कएल जेबाक चाही। मासिक धर्मक दिनसभमे त्रिसंध्या हमेशाक तरह तीनों समय कएल जाइत अछि — बाजि कऽ वा मनहि मन। ओहि सात दिनक लेल श्रीमद्भागवत महापुराणक पाठ नहि करबाक चाही, मुदा एकरा सुनल जा सकैत अछि

सूतकक दौरान सेहो, तीनों समय त्रिसंध्या कएल जा सकैत अछि; मुदा ओहि समय श्रीमद्भागवत महापुराण नहि पढ़बाक चाही आ नहि सुनबाक चाही, आ सत्संगमे शामिल नहि होएबाक चाही। दुनू अवस्थामे श्रीमद्भागवत महापुराण आ पूजाक अन्य वस्तुसभकेँ छूबाक नहि चाही

2. जँ सही समय पर पूरा त्रिसंध्या संभव नहि हो तँ की करबाक चाही?

जँ सही समय पर पूरा त्रिसंध्या संभव नहि अछि, तँ ओहि समय संक्षिप्त त्रिसंध्या करू, आ समय भेटला पर पूरा त्रिसंध्या बादमे करू।

त्रिकाल संध्या कतहुओ कएल जा सकैत अछि — कार्यस्थल पर, सड़क पर चलैत काल, गाड़ी चलाबैत काल, स्कूलमे, वा कोनो अन्य काज करैत काल सेहो: चुपचाप, मनहि मन। उचित समय पर त्रिसंध्या करब, चाहे स्थान कोनो भी हो, अत्यंत आवश्यक अछि।

जँ त्रिकाल संध्या उचित समय पर नहि कएल जा सकल, तँ भगवान माधव क नाम लिअ आ पश्चाताप करू, आ भगवानसँ प्रार्थना करू जे आब ई उचित समय पर भऽ सकय; कारण शास्त्रसभक कथन अछि जे त्रिकाल संध्या अपन उचित समय परहि कएल जेबाक चाही।

समय नहि भेला पर त्रिकाल संध्याक विधि

गूगल मीटमे पंडित जी द्वारा देल गेल श्लोक। जखन संध्या करबाक अवसर नहि भेटय आ समय बीतल लागय, तँ संध्याक स्थान पर अहाँ 108 बेर माधव नामक जप, 11 बेर जय दुर्गा माधव, आ नीचा देल गेल श्लोकक एक बेर पाठ कऽ सकैत छी।

दशावतार स्तोत्रम् (अंतिम श्लोक)

वेदान् उद्धरते जगन्निवहते भूगोलम् उद्बिभ्रते
दैत्यं दारयते बलिं छलयते क्षत्रक्षयं कुर्वते।
पौलस्त्यं जयते हलं कलयते कारुण्यम् आतन्वते
म्लेच्छान् मूर्च्छयते दशाकृतिकृते कृष्णाय तुभ्यं नमः॥

3. छात्रसभकेँ अपन दिनचर्याक संग त्रिसंध्या कोना करबाक चाही?

छात्रसभकेँ नियमानुसार उचित समय पर प्रातः (ब्रह्म मुहूर्त) आ सायं संध्या करबाक चाही। स्कूल वा पढ़ाईक व्यस्तताक कारण, ओ मध्याह्न संध्या हृदयमे, मनहि मन भगवानक ध्यान करैत पूरा कऽ सकैत छथि।

4. कार्यस्थल पर त्रिसंध्या कोना कएल जेबाक चाही?

त्रिसंध्याक लेल स्थानक कोनो नियम नहि अछि। अहाँ जतय सेहो छी, एकरा कऽ सकैत छी — अपन डेस्क पर, फैक्ट्रीमे, दुकानमे, खेतमे, वा रास्तामे

जँ एकरा जोरसँ बाजब संभव नहि हो, तँ एकरा मनहि मन (हृदयमे) करू; हृदयहि पर्याप्त स्थान अछि। जँ संभव हो, तँ अपन जूता उतारि लिअ आ एक क्षणक लेल बैसि जाउ; आ जँ ओहो संभव नहि हो, तँ एहि कारणसँ त्रिसंध्याकेँ नहि छोड़ू।

जँ अहाँकेँ ई याद नहि अछि आ संभव अछि, तँ अहाँ त्रिसंध्याक ऑडियो सुनि सकैत छी। मुख्य बात ई अछि जे ई छूटबाक नहि चाही।

5. जँ घरक काजसँ समय नहि भेटैत अछि, तँ त्रिसंध्याक अभ्यास कोना कएल जेबाक चाही?

काज करैत काल त्रिसंध्या करू — एकरा लेल खाली समयक इंतजार करबाक आवश्यकता नहि अछि; हाथ व्यस्त भेला पर सेहो एकरा मनहि मन कएल जा सकैत अछि।

भागवतक लेल, अहाँ जे किछु समय निकालि सकय निकालू — जँ पूरा अध्याय संभव अछि तँ एक अध्याय, आ जँ नहि, तँ एक पृष्ठ, वा एतय धरि जे एक श्लोक सेहो। ई ध्यानमे राखल जेबाक चाही जे बिना पाठ कएने एको दिन नहि बीतय।

6. मासिक धर्मक समय महिलासभकेँ त्रिसंध्याक पालन कोना करबाक चाही?

मासिक धर्मक समय, पूरा सात दिन धरि भागवतक पाठ नहि करबाक चाही। एकरा सुनल जा सकैत अछि

तीनों समय त्रिसंध्या करू। जँ अहाँकेँ याद नहि अछि, तँ एकरा सुनू।

(श्रीमद्भागवत महापुराण, वा पूजाक अन्य वस्तुसभकेँ नहि छूऊ।)

7. जँ परिवारक एक व्यक्ति त्रिसंध्याक पालन करैत अछि, तँ की ओ सभकेँ एकर फल भेटत?

प्रत्येक व्यक्तिक लेल स्वयं एकर पालन करब आवश्यक अछि। जँ परिवारमे कोनो पढ़ि नहि सकैत अछि, तँ हुनका त्रिसंध्या आ भागवत सुनाऊ। आ जे बाजि वा सुनि नहि सकैत छथि, हुनका लेल जतय धरि संभव हो, हुनका बार-बार 'माधव' नाम लिखबाक प्रयास करू।

8. जँ हम मांसाहार करैत छी आ शराब पीबैत छी, तँ की हम त्रिसंध्या शुरू कऽ सकैत छी?

नहि, त्रिसंध्या शुरू करबासँ पहिने पूरी तरहसँ शाकाहारी जीवन शैली अपनाबय पड़त, अंडा सेहो नहि खाएबाक चाहीकोनो भी प्रकारक नशा (जेना शराब, भांग, सिगरेट, तंबाकू उत्पाद, पान मसाला, गुटखा आदि) सेहो निश्चित रूपसँ बंद कऽ देबाक चाही

9. की त्रिसंध्या शुरू करबाक लेल हमरासभकेँ प्याज आ लहसुनसँ परहेज करबाक आवश्यकता अछि?

नहि, प्याज आ लहसुन खाएला पर सेहो अहाँ त्रिसंध्या कऽ सकैत छी। केवल सभ प्रकारक मांसाहारसँ बचबाक चाही (अंडा सहित)।

10. की महिलासभ गायत्री मंत्र आ त्रिसंध्याक पाठ कऽ सकैत छथि?

हाँ, महिलासभकेँ त्रिसंध्याक दौरान तीन बेर गायत्री मंत्रक पाठ करबाक चाही

11. की हम उपनयन संस्कार (जनेऊ) क बिना गायत्री मंत्रक पाठ कऽ सकैत छी?

हाँ, पवित्र जनेऊ धागा नहि पहिरला पर सेहो अहाँ गायत्री मंत्रक पाठ कऽ सकैत छी। अहाँ कोनो गुरुसँ दीक्षित भेने बिना सेहो त्रिसंध्याक सभ मंत्रसभक पाठ कऽ सकैत छी।

12. की हम शाप विमोचन क बिना गायत्री मंत्रक पाठ कऽ सकैत छी?

हाँ, अहाँकेँ त्रिसंध्या करैत काल बिना कोनो शाप विमोचनक तीन बेर गायत्री मंत्रक पाठ करबाक चाही।

13. जँ कोनो निरक्षर, दिव्यांग, शिशु वा वरिष्ठ नागरिक अछि, जे त्रिसंध्या पढ़बामे असमर्थ अछि, तँ हुनका की करबाक चाही?

जँ कोनो त्रिसंध्या पाठ पढ़बामे असमर्थ अछि, तँ ओ त्रिसंध्याक समय दिनमे तीन बेर एकर ऑडियो सुनि सकैत छथि। शिशुसभकेँ छूट देल गेल अछि जँ हुनकर मातासभ त्रिसंध्या करैत छथि (हुनका लाभ हेतन्हि)। मुदा, पैघ भेला पर हुनका त्रिसंध्याक अभ्यास अवश्य करबाक चाही

विश्व सनातन धर्म सेवा ट्रस्ट

त्रिसंध्या एवं अन्य धार्मिक जानकारीक लेल व्हाट्सएप पर संपर्क करू:

+91 9923071727

आधिकारिक वेबसाइट एवं यूट्यूब चैनल्स

भविष्य मालिका: www.bhavishyamalika.com

कल्कि अवतार - द ऑफिशियल चैनल: https://www.youtube.com/@Kalki_Avatara

डायनेस्टी ऑफ लॉर्ड कल्कि (एकटा नव दुनियाक मार्ग): https://youtube.com/@dynastyofkalki

कल्कि अवतार रशियन: https://youtube.com/@kalkiavatarrussian

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कल्कि अवतार स्पेनिश: https://youtube.com/@kalkiavatarspanish

कल्कि अवतार कन्नड़: https://youtube.com/@kalkiavatarkannada

जय श्री माधव

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